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पूर्णता ही ख़ोख़लेपन का सर्वोच्च और अनन्तिम सत्य है!

संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से 11/9/2021

सुनता है गुरु ज्ञानी, गगन में आवाज़ हो रही झीनी-झीनी। ------ अड़सठ घाट भीतर हैं, कहाँ जाना है? न गंगा, न यमुना, सुमिरन कर ले मेरे मना, मन चंगा तो कठौती में ही गंगा है। बीती जा रही है, सबकी उमर पर हम मानने को तैयार ही नही हैं। इसी घट अन्तर बाग-बग़ीचे, पर भागना रुक नहीं रहा है। सोचने-समझने को तैयार नहीं हैं।  -----

अपनी डिजिटल डायरी का एक वर्ष..

टीम डायरी, 11/9/2021

भारतीय परम्परा में "सप्त" का बहुत महत्त्व है। विवाह में सप्तपदी होती है। वहीं सात कदम साथ चलने से सज्जनों में मित्रता हो जाती है - "सतां सप्तपदी मैत्री"। सप्तऋषि, सात द्वीप, सात चक्र, सात दिन, सात स्वर, सात लोक, सात पदार्थ, पूजनीयों की संख्या भी सात ही है ईश्वर, गुरु, माता, पिता, सूर्य, अग्नि तथा अतिथि।

इस तरह बहुत सी चीजें है जो सात के समूह में उपलब्ध होती हैं। सूर्य की सात रश्मियाँ, जो सात भिन्न रंगों में होती हैं। सूर्य अपनी इन्हीं सात रश्मियों के माध्यम से जीवन प्रदान करता है। 

अपनी डिजिटल डायरी का एक वर्ष..

टीम डायरी, 11/9/2021

‘अपनी डिजिटल डायरी’ की पहली वर्षगाँठ पर पूरे डायरी परिवार को अनन्त शुभकामनाएँ...

अपनी डिजिटल डायरी का एक वर्ष..

टीम डायरी, 11/9/2021

‘अपनी डिजिटल डायरी’ की पहली वर्षगाँठ पर पूरे डायरी परिवार को अनन्त शुभकामनाएँ...

अपनी डिजिटल डायरी का एक वर्ष..

टीम डायरी, 11/9/2021

‘अपनी डिजिटल डायरी’ की पहली वर्षगाँठ पर पूरे डायरी परिवार को अनन्त शुभकामनाएँ...

अपनी डिजिटल डायरी का एक वर्ष..

टीम डायरी, 11/9/2021

‘अपनी डिजिटल डायरी’ की पहली वर्षगाँठ पर पूरे डायरी परिवार को अनन्त शुभकामनाएँ...

अंग्रेजों ने ज़मीन और खेती से जुड़े जो नवाचार किए, उसके नुकसान क्या हुए?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 9/9/2021

ब्रिटिश सरकार ने ज़मीन से संबंधित जो कानून बनाए उनका पहला उद्देश्य था कि मालिक़ाना हक़ की स्थिति परिभाषित की जाए। राजस्व संग्रह बेहतर करने के लिए यह ज़रूरी था। लेकिन लगान के ऊँचे आकलन ने ग्रामीण इलाकों में लोगों की आर्थिक स्थिति को झिंझोड़ डाला। ज़मीन के मामलों से जुड़ीं दो अलग-अलग प्रणालियों- ज़मींदारी और रैयतवाड़ी ने सामाजिक अव्यवस्था की स्थिति भी पैदा कर दी। ख़ासकर, जिन इलाकों में ज़मींदारी सिद्धांत के आधार पर ‘स्थायी बंदोबस्त’ लागू था, वहाँ गैर-ग्रामीण ज़मींदारों की तादाद बढ़ गई। वे गाँवों के बजाय दूसरी जगहों, शहरों आदि में रहते थे। ज़मीनों से मुनाफ़ा वसूली उनका मुख्य मक़सद था। इससे

बारिश में इन गड्ढों का इस्तेमाल भूजल स्तर में बढ़ोतरी के लिए किया जाएगा!

ए. जयजीत, भोपाल, मध्य प्रदेश से, 9/9/2021

मेरे शहर में दो सड़कें हैं। वैसे तो कई सड़कें हैं,लेकिन आज हम इन दो सड़कों की बात ही करेंगे। एक ख़ास सड़क है। वह उतनी ही ख़ास है जितना कि ख़ास कोई नेता या अफ़सर या जज या इनकी पत्नियाँ होती हैं। इसे कहने को ‘वीआईपी रोड’ कह सकते हैं। वैसे ये ख़ास रोड है तो ‘हुजूर’, ‘सरकार’, ‘जी मालिक’, ‘जी मालकिन’ टाइप के सम्बोधन अधिक फ़बते हैं। दूसरी आम सड़क है। ऐसी आम सड़कों की भरमार है। जिधर देखो, उधर आम ही आम सड़कें। यह वैसी ही आम है, जैसे मैं और आप। चूँकि ये आम सड़क है तो इन्हें प्यार से ‘अबे’, ‘ओए’, ‘स्साली’ जैसा कुछ भी कह सकते हैं। ये बुरा नहीं मानती। ह

‘रैयतवाड़ी व्यवस्था’ किस तरह ‘स्थायी बन्दोबस्त’ से अलग थी?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 8/9/2021

लंदन में बैठे कंपनी के निदेशक मंडल ने कॉर्नवालिस को आदेश दिया था कि वह राजस्व संग्रह के लिए किन्हीं स्थायी नियमों को अमल में लाएँ। ऐसे में, उनके पास ज़मींदारों को मान्यता देने के अलावा कोई रास्ता नहीं रह गया। कारण कि उनके पास किसानों से सीधे लगान वसूलने के तब तक कोई साधन ही नहीं थे। बहरहाल, बंगाल में ज़मीनों के मालिक कितना लगान अदा करेंगे, यह तय था। इसका उनकी आर्थिक स्थिति से कोई संबंध नहीं था। नियम ये भी था कि अगर ज़मीन मालिक तयशुदा लगान सरकार को नहीं दे पाए तो उनकी ज़मीन किसी और को बेची जा सकती थी।

स्थायी बंदोबस्त की व्यवस्था क्यों लागू की गई थी?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 7/9/2021

जब अंग्रेजों ने बंगाल में प्रत्यक्ष रूप से शासन हाथ में लिया तो शुरू में ज़मींदारों के ज़रिए लगान वसूली की। ज़मींदारों के इलाके बँटे हुए थे, जो आकार में अलग-अलग थे। इस व्यवस्था ने नि:संदेह भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित किया। इसके बावज़ूद 1772 तक अंग्रेजों ने इसे ज़ारी रखा। रॉबर्ट क्लाइव ने इसका स्वाभाविक कारण बताया, “शुरू में हमारे लिए ज़रूरी था कि हम सरकारी-तंत्र के पुराने अधिकारियों पर भरोसा करें। उनसे हमें जानकारियाँ जो हासिल करनी थीं। इसीलिए अपने हित की दृष्टि से उन्हें साथ जोड़ना पड़ा। यह व्यवस्था हमें तब तक जारी रखनी थी जब तक हमारा अनुभव उसकी ज़रूरत को न्यूनतम न बता दे। नीति की

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