अपनी डिजिटल डायरी का एक वर्ष..

भारतीय परम्परा में "सप्त" का बहुत महत्त्व है। विवाह में सप्तपदी होती है। वहीं सात कदम साथ चलने से सज्जनों में मित्रता हो जाती है - "सतां सप्तपदी मैत्री"। सप्तऋषि, सात द्वीप, सात चक्र, सात दिन, सात स्वर, सात लोक, सात पदार्थ, पूजनीयों की संख्या भी सात ही है ईश्वर, गुरु, माता, पिता, सूर्य, अग्नि तथा अतिथि।

इस तरह बहुत सी चीजें है जो सात के समूह में उपलब्ध होती हैं। सूर्य की सात रश्मियाँ, जो सात भिन्न रंगों में होती हैं। सूर्य अपनी इन्हीं सात रश्मियों के माध्यम से जीवन प्रदान करता है। 

पूजनीयों में गुरु का स्थान दूसरा है। भारतीय परम्परा में ऋषि गुरु पद पर आसीन होते हैं। सप्त ऋषियों ने अपने तप, अपने कौशल से, परिश्रम से और ज्ञान से इस भारत भूमि को सींचा है। 

आज भारत में उपलब्ध वंश परम्परा भी इन सप्त ऋषियों की देन है। ऋषि पंचमी का पर्व इन ऋषियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन हेतु भारत भर में मनाया जाता है। 

भारत मात्र उक्त सात ऋषियों का ही कृतज्ञ नहीं है, अपितु इस देश का प्रत्येक कण, प्रत्येक क्षेत्र, समस्त संस्कृति, समस्त परम्पराएँ ऋषियों की ऋणी हैं और सदा रहेंगी।

हमारी "अपनी डिजिटल डायरी" का प्रारम्भ भी बीते साल ऋषि पंचमी के दिन ही हुआ था। तब से अनवत्, डायरी अपनी विविधतापूर्ण और स्वस्थ सामग्री के माध्यम से, ऋषियों की समाज-कल्याण, मानव-कल्याण से सम्बन्धित वाणी के वाहक रूप में, स्वयं को स्थापित करने का गिलहरी-प्रयास कर रही है। 

डायरी अपने प्रत्येक पाठक, लेखक, सहयोगी के माध्यम से भारतीय ज्ञान परम्परा को प्रचारित और प्रसारित कर ऋषियों के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित कर रही है।

हम अपने नाम अर्थात् "अपनी डिजिटल डायरी" के संक्षिप्तीकरण यानि ‘ADD’ के प्रति भी हमेशा सचेत और सजग हैं। इस नाते लगातार स्वस्थ समाज को जोड़ने और उससे जुड़ने के प्रयास कर रहे हैं। अपनेपन के साथ इस उद्देश्य से बँघे हुए हैं।

ऋषि परम्परा एक तरफ "वसुधैव कुटुम्बकम्" की बात करती है। वह "सर्वे सुखिन: संतु" का भाव भी अपने आप में समेटे है। ऐसे ही डायरी अपने साथ जुड़ रहे और भविष्य में जुड़ने वाले हर व्यक्ति की उन्नति, सबका सुकून, सभी के सौख्य का लक्ष्य और उद्देश्य लेकर आगे बढ़ रही है।

हम भारतीय परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए परिवारिक मूल्यों के अनुरूप बौद्धिक सामग्री उपलब्ध करा सकें, ऐसा दृढ़ प्रयास है।

डायरी का प्रयास है कि वह सात रश्मियों की तरह, सातों दिन सबके जीवन में सात रंगों का उल्लास बिखेरती रहे। सात स्वरों की तरह सभी के जीवन को तरंगित करती रहे। कुछ इस तरह कि व्यस्ततम जीवन के विविध उद्वेगों से उद्वेलित हर मन की सुकून की खोज डायरी पर पहुँचकर पूरी हो।
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(#अपनीडिजिटलडायरी परिवार की ओर से अनुज राज पाठक
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‘अपनी डिजिटल डायरी’ की पहली वर्षगाँठ पर पूरे डायरी परिवार को अनन्त शुभकामनाएँ...

 

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