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प्रदूषित हवा में साँस ले रहा है हर शख़्स, सोचिए ज़िम्मेदार कौन?

देवांशी वशिष्‍ठ, दिल्ली से, 6/4/2022

आज के बुलेटिन में ख़ासः

जलवायु परिवर्तन पर यूएन का रक्षा सूत्रः समय रहते चेतो, उपाय करो

देवांशी वशिष्‍ठ, दिल्ली से, 25/03/2022

आज के एपिसोड में सुनिएः 

प्रिय मुनिया, मेरी लाडो, आगे समाचार यह है कि...

दीपक गौतम, सतना, मध्य प्रदेश, 23/3/2022

प्रिय मुनिया, 

हम सभी भारतीयता के रंग से सराबोर हों

टीम डायरी, 18/3/2020

होलीकोत्सव रंगों का उत्सव है। इसमें कोई भी रंग किसी से अलग नहीं बल्कि सभी मिलकर एक-रंग हो जाते हैं। हमारा देश अपनी विविधताओं से, विविध रंगों से उज्ज्वल है। हम ऊपरी तौर पर भले अलग-अलग दिखाई दें लेकिन भारतीय के तौर पर हम केवल भारत के एक नागरिक हैं। शुभम् आर्यन ने अपनी छोटे से चलचित्र के माध्यम से ऐसा ही सुन्दर सन्देश देने का प्रयास किया है। इसको सार्थक बनाते हुए आइए हम सभी भारतीयता के रंग से सराबोर हों भारत को सम्पन्न, समृद्ध, खुशहाल और श्रेष्ठ बनाएँ।

सभी को #अपनीडिजिटलडायरी की तरफ से रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ। 

जानिए...एंडरसरन की रिहाई में तब के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की क्या भूमिका थी?

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 17/3/2022

छह- अर्जुनसिंह, मुख्यमंत्री : राजीव गांधी के दबाव में और एंडरसन के प्रभाव में थे। चुनाव के समय आए इस संकट में अपनी पोजीशन को बनाए और बचाए रखते हुए उन्हें एक साथ तीन को संतुष्ट करना था। पहला प्रधानमंत्री के नाते राजीव गांधी, दूसरा- अमेरिकी आभामंडल के प्रतीक एंडरसन और तीसरा- यहां की पीड़ित-प्रताड़ित जनता। एंडरसन की कसौटी पर ये खरे उतरे, क्योंकि जाते वक्त वह उन्हें गुड-गवर्नेस का तमगा देकर गया। कानूनी खानापूर्ति के लिए एंडरसन की गिरफ्तारी कराई, लेकिन गैर-कानूनी तौर पर उसे जाने भी दिया। ऐसा करके इन्होंने एक तीर से कई निशाने साधे। पहला- चुनावी मौसम में हुए भयानक गैस हादसे स

नासिक के चंद्रप्रकाश पाटिल को अगर जानते हैं तो भी फिर जाना जा सकता है

टीम डायरी, 4/3/2022

नासिक, महाराष्ट्र के चन्द्रप्रकाश पाटिल। उन्हें सिर्फ़ नासिक के लोग ही नहीं जानते, देश भर के लोग पहचानते हैं। साल में दो-तीन बार इनके बारे में कहीं न कहीं, कुछ न कुछ ख़बर आती रहती है। हालांकि तब भी सम्भव है कि बहुत से लोग इन्हें न जानते हों। इनके काम को न जानते हों। इसलिए #अपनीडिजिटलडायरी ने भी इनके सरोकारों के साथ जुड़ने की कोशिश की है। इसमें दूसरा मक़सद यह भी है कि भले चन्द्रप्रकाश के प्रयास जाने-माने हैं, लेकिन उनके बारे में बार चर्चा होना ज़रूरी समझा जा सकता है। कहा जाता है न, ‘रसरी आवत जात ही, सिल पर पड़त निसान’। यानि सिल अर्थात् पत्थर पर निशान बनाना है, तो रस्सी को क

पढ़िए...एंडरसरन की रिहाई के लिए कौन, किसके दबाव में था?

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 3/3/2022

एंडरसन की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका ने अपना री-प्रजेंटेशन दिया, उसे ही केंद्र ने दबाव समझ लिया। अमेरिकी सरकार की ओर से सीधे तौर पर किसी दबाव के सबूत भी नहीं हैं। न तो रीगन ने राजीव से बात की और न ही व्हाइट हाऊस प्रवक्ता ने अपने बयान में ऐसी कोई जानकारी दी। केवल अमेरिकी आग्रह के बाद यहां हर स्तर पर आंखें बंद करके फैसले होते चले गए। कहीं से भी यह आवाज नहीं उठी कि एंडरसन को छोड़ना गैरकानूनी है।… आइए विस्तार से समझें कि कौन किससे बंधा था, जुड़ा था, प्रभाव या दबाव में था और किन किरदारों ने एंडरसन को बाइज्जत जाने का मौका दिया।…  

चेतना लक्षणो जीव:, ऐसा क्यों कहा गया है?

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 1/3/2022

मानव जीवन की जैसे-जैसे समझ विकसित होती है, वैसे-वैसे संसार और जीवन को जानने की मानव की इच्छा बलवती होने लगती है। इसके परिणाम में वह अपनी समझ अपनी बुद्धि और अपने तर्कों का प्रयोग करना शुरू कर देता है। वह तब तक नहीं रुकता जब तक उसके मन में पैदा होने वाले प्रश्न समाप्त नहीं हो जाते। हालाँकि मानव अपनी युक्तियों का प्रयोग जितना अधिक करता है, वह उतना ही अधिक उलझता प्रतीत होता है। कई दर्शन ‘नेति-नेति’ तक कह उठते हैं। और अंततः वह बाहरी समाधान के अभाव में अपने अन्दर की गहराइयों में उतरने लगता है। इस अन्तर्मन की गहराइयों की अनुभूतियों को अपने-अपने अनुभव से अभिव्यक्त करता है। 

एक समय ऐसा आता है, जब हम ठहर जाते हैं, अपने आप में

संदीप नाइक, देवास, मध्य प्रदेश से, 27/2/2022

संसार में समुद्रों की कमी नहीं है और इसका अर्थ यह भी है कि पानी की कमी नहीं है। पानी, जो हर कहीं ढल जाता है, रंग रूप बदल लेता है। पर मेरे पास एक मटका है, जिसे मैंने बरसों से सम्हाल रखा है। पानी भरने और उलीचने की नियमित प्रक्रिया में वह इतना पक गया है कि अब उसके फूटने की गुंजाइश बहुत कम बची है। हालाँकि इधर शाम होते ही वह टपकने लगता है। हर 10-20 मिनिट बाद जब एक बूँद गिरती है, तो उसका शोर ब्रम्हांड में यूँ दर्ज होता है, मानो उल्का पिंड टकराए हों। और मैं अब मानकर चलता हूँ कि मटका अब फूटेगा नहीं। यूँ ही टप, टप, टप करके खाली होता जाएगा। एक दिन निर्जल हो जाएगा। फिर उसकी मिट्टी, वह गार जिस पर कुछ न

यह अमेरिका में कुछ खास लोगों के लिए भी बड़ी खबर थी

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 24/2/2022

गैस त्रासदी मामले को रीओपन करने की तैयारियों के बीच इस बार सुप्रीम कोर्ट में गैस पीड़ितों की नुमाइंदगी एडीशनल सॉलिसीटर जनरल विवेक तन्खा कर सकते हैं। तन्खा प्रदेश सरकार की ओर से गठित विधि विशेषज्ञों की समिति चेयरमैन भी हैं। यही समिति केस को रीओपन करने की रणनीति तैयार करने में लगी है। प्रदेश के विधि मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि हम जरूर चाहेंगे कि इस मामले में तन्खा गैस पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने कहा सरकार का पूरा प्रयास होगा कि सत्र न्यायालय सहित एपेक्स कोर्ट में भी दिग्गज वकीलों का पैनल खड़ा हो। 

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