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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिन्दी एक कठिन भाषा है! उर्दू, फारसी और अंग्रेजी सीखिए जनाब!!

देवांशु झा, दिल्ली से, 20/8/2020

करीब दस साल पहले एक चैनल से विदा होते हुए जब मैं अपने साथियों से अन्तिम बार मिल रहा था, तब एक कमउम्र लड़की ने मुझसे बाय कहा। मैंने जवाब दिया, “देखो.. जल्दी भेंट होगी!” वह कुछ विस्मय से बोली, “सर आप हिन्दी के बड़े अच्छे और भूले-बिसरे शब्द बोलते हैं।”

रचना ऐसी अद्भुत हो तो क्या शीटी बजाना तब भी बुरा होगा?

टीम डायरी ; 19/8/2020

शीटी बजाना आम तौर पर अच्छा नहीं माना जाता। अक्सर बड़े-बुज़ुर्ग ऐसा करने से छोटों को रोकते हैं। कई बार शीटी के चक्कर में पिटने-पीटने की नौबत भी आ जाती है। लेकिन ऐसी आम धारणा को इस वीडियो में प्रदर्शित रचनात्मकता पूरी तरह छिन्न-भिन्न करती है।

यह वीडियो ‘इंडियन व्हिशलर्स एसोसिएशन’ के यू-ट्यूब चैनल से लिया गया है। ये संगठन उन लोगों का है, जिन्होंने शीटी बजा-बजाकर सुर-संगीत को साध लिया है। वह भी इस स्तर पर कि देखने-सुनने वाले के मुँह से ‘वाह’ निकल उठे। इतना कि दूरदर्शन जैसे राष्ट्रीय चैनल पर भी इनकी शीटियों से निकली रचना का प्रदर्शन किया जाने लगे।

प्रतीकात्मक तस्वीर

माँ के रूप में मेरी ज़िन्दगी का सबसे यादग़ार लम्हा, जब बेटी ने पूछा- मम्मा, मैं आपके जैसी कब बनूँगी?

शिखा पांडे, अहमदाबाद, गुजरात से ; 10/ 8/2020

मैं शिखा पांडे। अहमदाबाद में अपने छोटे से, प्यारे से परिवार के साथ रहती हूँ। मेरी दो प्यारी सी बेटियाँ हैं। अमिषी और श्रीतिजा। आज सुबह की बात है। मैं कुछ काम कर रही थी। तभी अमिषी मेरे पास आई और बोली, “मम्मा! मैं आपके जैसी कब दिखूँगी? आपके जैसी कब बनूँगी?” मैंने उससे पूछा, “तुम्हें मेरे जैसा बनना है? मेरे जैसा दिखना है?” तो उसका ज़वाब आया, “हाँ मम्मा!

प्रभु की कृपा भयउ सब काजू। जन्म हमार सुफल भा आजू।।

टीम डायरी ; 5/8/2020

अयोध्या में बुधवार पाँच अगस्त को श्रीराम जन्मभूमि पर मन्दिर के निर्माण का शुभारम्भ हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिन में करीब साढ़े बारह बजे शुभ मुहूर्त में शिला पूजन कर निर्माण कार्य का श्रीगणेश किया। लगभग पाँच सौ साल के लम्बे संघर्ष के बाद देश आज इस ऐतिहासिक घटना का साक्षी बना है। संघर्ष के दौर में पीढ़ियाँ खप गईं।

पटरी पर रोटी और बेपटरी रोजी!

महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास शुक्रवार (आठ मई) तड़के एक मालगाड़ी पटरी पर सो रहे 16 कामगारों को कुचलते, काटते गुजर गई। इस हादसे की जो तस्वीरें आईं, उनमें रेल पटरी पर पड़ी हुई खून से सनी रोटियों की भी तस्वीर थी। वे रोटियाँ जो मज़दूरों ने शायद अगले दिन के लिए बचा रखी थीं। मगर वे उनको खाते, इससे पहले मौत उन्हें खा गई।

विज्ञान ‘चाँद’ को धरती पर ले आया पर धरती की ही गुत्थियाँ न सुलझा पाया

दो दिन पहले दो ख़बरें पढ़ीं। दोनों दिलचस्प। विज्ञान के दो दीगर पहलुओं से जुड़ी हुईं। साथ ही हमें सोचने पर मज़बूर करती हुईं भी। इनमें से एक ख़बर बताती है कि चाँद की मिट्‌टी पर पहला हक़ हमारा यानि हिन्दुस्तान का होगा। क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) को चाँद में पाई जाने वाली मिट्‌टी का पेटेंट मिल गया है।

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