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ज्ञान की गोली! अब बिना वीज़ा के कीजिए 60 देशों की यात्रा

देवांशी वशिष्‍ठ, दिल्ली से, 13-01-2022

आज के बुलेटिन में सुनिएः

आप क्या सोचते हैं? क्या नाइंसाफियां सिर्फ हादसे के वक्त ही हुई?

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 12/1/2022

यूनियन कार्बाइड फैक्टरी की सुरक्षा पर सरकार को हर महीने करीब दो लाख रुपए खर्च करना पड़ रहे हैं।… विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) के साथ ही होमगार्ड के जवान भी फैक्टरी परिसर में तैनात हैं। फैक्टरी की जमीन और परिसर में स्थित संपत्ति फिलहाल जिला प्रशासन के कब्जे में है। प्रशासन के सूत्रों के अनुसार 1999 में जब सरकार के एक निर्णय के तहत फैक्टरी परिसर का कब्जा उद्योग विभाग से कलेक्टर (गैस त्रासदी एवं पुनर्वास) को सौंपा था, तब सुरक्षा का जिम्मा प्राइवेट सिक्युरिटी एजेंसी के हाथों था। जून 2003 से प्रशासन ने यहां होमगार्ड जवान तैनात कर दिए।… 

सिफारिशें मानने में क्या है, मान लेते हैं...

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 7/1/2022

मप्र सरकार गैस त्रासदी पर भोपाल सीजेएम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील दायर करेगी। साथ ही वह सुप्रीम कोर्ट में भी धारा 304 दो का प्रकरण रीओपन करने के लिए याचिका दाखिल करने जा रही है। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और विधि मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एक प्रेस कांफ्रेंस में इस मामले को लेकर गठित विधि विशेषज्ञों की कमेटी के निष्कर्षों की जानकारी दी। 

उन्होंने सीबीआई के साथ गैस पीड़तों को भी बकरा बनाया

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 6/1/2022

भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में गैस पीड़ितों पर प्रायोगिक दवाओं के परीक्षण के खुलासे के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। गैस पीड़ितों ने मरीजों पर दवाओं के हुए प्रयोग की शिकायत सुप्रीम कोर्ट में करने का निर्णय लिया है।…यहां डॉक्टरों ने करीब एक हजार गैस पीड़ितों पर उन्हें बिना बताए वर्ष 2005-2008 की अवधि में दवाओं का परीक्षण किया है। दवाओं का प्रायोगिक परीक्षण मुख्य रूप से हृदय, श्वांस, पेट समेत कुछ अन्य रोगों के उपचार के संबंध में किया गया।… गैस पीड़ितों के शरीर पर प्रायोगिक दवाओं का क्या प्रभाव पड़ा, डॉक्टरों ने इसका अध्ययन भी नहीं किया। …उधर बीएमएचआरसी के कार्

शरीर असली पापी नहीं है..पाप तो हमारा मन ही करता है

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 4/11/2022

सेवानिवृत्त न्यायधीश देवाशीष ट्रेन की सीट पर बैठे ही थे कि सामने बैठी युवती ने स्नेहमिश्रित सम्मान से अभिवादन किया। देवाशीष के लिए अनजान युवती का अभिवादन आश्चर्यजनक था। युवती ने पूछा, “अंकल, आप ने पहचाना नहीं?” देवाशीष ने कहा, “बेटी, मुझे याद नहीं कि आप से कब मिला।”

युवती ने कहा, “आप मुझे कैसे पहचानोगे? आप से मैं तब मिली थी, जब मैं दस साल की थी। आप तब सूर्यपुर में जिला फैमिली कोर्ट में जज थे।”

“बेटा, मैं अब तो मुझे सेवानिवृत हुए पाँच साल हो गए। कहाँ सब याद रहता है, ऊपर से इतनी पुरानी बात।”

पहले हम जैसे थे, आज भी वैसे ही हैं… गुलाम, ढुलमुल और लापरवाह! 

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 3/1/2022

...खबर मिली है कि भारत ने डाऊ कैमिकल्स को इस बात की गारंटी दे दी थी कि उसे पैतृक कंपनी यूनियन कार्बाइड के अपराध यानी भोपाल गैस त्रासदी का जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। आरटीआई याचिका को मिले जवाब में यह संदेह पुख्ता हो रहा है। 2006 में डाऊ केमिकल्स के तत्कालीन सीईओ लिवरिस द्वारा अमेरिका में भारतीय राजदूत रोनेन सेन को लिखा पत्र यही कहता है। एंड्रयू ने साफ कहा है कि डाऊ केमिकल्स 1984 के भोपाल हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं है। 

ज्ञान की गोली..आज बात पढ़ने-लिखने, खेलने-खुलने की

देवांशी वशिष्ठ, दिल्ली से, 3/1/2022

#अपनीडिजिटलडायरी के पाठकों को #नॉलेजपिल्स में देवांशी आज बता रही हैं, पढ़ने-लिखने की बातें। खेलने-खुलने की बातें। जैसे- देश के शिक्षा मंत्री ने एक अभियान शुरू किया है, ‘पढ़े भारत, बढ़े भारत’। बच्चों में यह अच्छी किताबें पढ़ने का रुझान विकसित करने के लिए चलाया जाने वाला अभियान है। ऐसे इस साल फुटबॉल विश्व कप जैसी कुछ बड़ी प्रतियोगिताओं की जानकारी भी   

किसी को उम्मीद नहीं थी कि अदालत का फैसला पुराना रायता ऐसा फैला देगा

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 31/12/2021

किसी को उम्मीद नहीं थी कि अदालत का फैसला 25 साल (अब 37 साल) पुराना रायता ऐसा फैला देगा। मीडिया में जो कुछ भी खुलकर आ रहा था, उससे पहली बार व्यापक रूप से जाहिर हो रहा था कि हादसे के बाद हुए षड्यंत्रों, फायदे के सौदों आपराधिक अनदेखी, केस को कमजोर करने और दोषियों को बचाने क एक लंबा सिलसिला चला था, जिसमें सबने खुशी-खुशी हाथ बटाए थे। ये सारे चेहरे बेनकाब हो रहे थे… 

अर्जुन सिंह ने कहा था- उनकी मंशा एंडरसन को तंग करने की नहीं थी

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 30/12/2021

राजीव सरकार में आंतरिक सुरक्षा मंत्री अरुण नेहरू ही यूनियन कार्बाइड मामले को देख रहे थे। हालांकि वे मंत्रिमंडल में 1986 में आए, लेकिन उसके पहले भी सरकार में उनकी तूती बोलती थी। प्रणब मुखर्जी ने जो 1995-96 में विदेश मंत्री थे और उन्होंने एंडरसन को फाइल आगे नहीं बढ़ाई थी। इसी कारण वे भी बैकफुट पर हैं। रविवार को मुखर्जी और नेहरू दोनों ने ही सात दिसंबर 1984 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अर्जुनसिंह के बयान को आधार बनाकर एंडरसन की रिहाई का दोषी उन्हें ही बता दिया। 

एंडरसन की रिहाई ही नहीं, गिरफ्तारी भी ‘बड़ा घोटाला’ थी

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 29/12/2021

दिल्ली में कांग्रेस पूरी कोशिश में है कि उसके महान् नेता राजीव गांधी की बेदाग बचा लिया जाए। एंडरसन की सुरक्षित रिहाई के दाग उनके दामन पर न आएं। 25 साल (अब 37) पहले इसी पार्टी की सरकारें जीवित एंडरसन को बचाने में लगी थीं। अब राजीव गांधी का ख्याल सबसे ऊपर है। बेमौत मारे गए हजारों बेकसूर लोगों और इतने सालों से तकलीफ झेल रहे हजारों दूसरे पीड़ितों से ज्यादा अहम यह है कि एक दिवंगत शख्स के दामन को बचाया जाए। 

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