सरोकार

आईसीएस में पहली बार कितने भारतीयों का चयन हुआ था और कब?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 21/10/2021

सर जॉर्ज कैंपबेल 1874 में बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे। उन्होंने वहाँ की शिक्षा नीति पर एक रपट तैयार की। इसमें लिखा, “ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की मदद से विद्यालयों की स्थापना के लिए आम जन और ग्राम समितियों को आमंत्रित किया जाता है। योजना गाँवों को ऐसे शिक्षक उपलब्ध कराने जुड़ी है, जो विद्यालयों को कार्यकुशलता से स्थानीय शैली के मुताबिक चला सकें। इस काम के लिए उन्हें मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता बहुत कम है। महीने में दो, तीन या चार रुपए ही।…पर ये भी तय है कि यह छोटी सी सरकारी आर्थिक सहायता बहुत दूर तक जाएगी। नई योजना का संतोषजनक पहलू ये है कि इसे हिंदु, मुसलिम दोनों

वायसराय जॉन लॉरेंस को ‘हमारा सबसे बड़ा शत्रु’ किस अंग्रेज ने कहा था?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 21/10/2021

भारत के लोगों के स्वास्थ्य के प्रति सरकार का रुख़ ब्रिटेन से प्रेरित था। दरअसल अंग्रेज फौजियों की मृत्यु दर तब बहुत ज़्यादा थी। इसके मद्देनज़र फ्लोरेंस नाइटिंगेल (ब्रिटेन की समाज सुधारक और आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक) ने ब्रिटिश सरकार को मज़बूर किया कि वह सैन्य ठिकानों में साफ-सफाई की जाँच कराए। इसी क्रम में भारत में भी जाँच का फैसला किया गया। लिहाज़ा मई 1859 में ब्रिटेन सरकार ने एक आयोग बनाया। लेकिन इस आयोग ने लंदन में बैठे-बैठे ही सतही रायशुमारी के आधार पर रिपोर्ट दी। ब्रिटेन सरकार ने नाइटिंगेल से इस पर विशेषज्ञ राय माँगी। उन्होंने राय दी भी लेकिन सरकार ने रिपोर्ट प्रकाशित नह

कारखानों में काम करने की न्यूनतम उम्र अंग्रेजों ने पहली बार कितनी तय की थी?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 18/10/2021

ब्रिटिश भारत में 1858 से पहले कई बार अकाल, भुखमरी, महामारी आदि की स्थितियाँ बनीं। उनसे बड़े बेतरतीब तरीके से निपटा गया था। साल 1866-67 तक ये हाल रहा। उसी साल पूर्वी भारत में भयंकर अकाल पड़ा। ओडिशा में व्यापक असर हुआ। इसकी गंभीरता को देर से पहचाना गया। स्थिति अनियंत्रित हो गई। बारिश शुरू होने से तमाम रास्ते बंद हो गए। इससे ओडिशा के लिए ज़रूरी चीजों की आपूर्ति ठप हो गई। नतीज़ा ये हुआ कि करीब एक तिहाई आबादी भूखमरी, महामारी से जान गँवा बैठी। सरकार ने बारिश के बाद प्रभावित इलाकों में खाद्यान्न पहुँचाया लेकिन तब तक देर हाे चुकी थी। पहले की तरह इसकी भी जाँच हुई। जाँच रिपोर्ट देखने क

प्लास्टिक उत्पादों से भारतीयों का परिचय बड़े पैमाने पर कब हुआ?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 17/10/2021

औद्योगिक विस्तार में सरकार की भूमिका 1914 से पहले महज निजी पूँजी और उद्यमों को प्रोत्साहन देने तक सीमित थी। वह भी ख़ास यूरोपीय कारोबारियों के लिए। सरकार ने 1905 में वाणिज्य विभाग स्थापित किया था। मग़र इसके प्रभाव बाद में नजर। इसके बाद पहला औद्योगिक आयोग 1916 में बना, जिसकी रपट सालभर बाद आई। इसमें कहा गया कि भारत “अब भी बने-बनाए उत्पादों के बजाय मुख्य रूप से कच्चे माल का उत्पादक ही है।” इस बीच, प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के दौरान भारत को हथियार उत्पादन के अलावा अन्य क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत पर सरकार का ध्यान गया। इस बारे में 1921 के राजकोषीय आयोग ने भी अनुशंस

भारत में औद्योगिक विस्तार का अगुवा किस भारतीय को माना जाता है?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 17/10/2021

भारत में उद्योगों का विस्तार मुख्य रूप से पूँजी के अधिग्रहण और रेलवे के फैलाव पर निर्भर रहा। यहाँ रेलवे की आधारशिला 1858 से पहले ही रख दी गई थी। सन् 1869 तक पूरे देश में 4,000 मील लंबे रेल पथ पर रेलें चलने लगी थीं। यह सब कुछ निजी पूँजी के बलबूते हुआ। हालाँकि सरकार ने रेल परियोजनाओं में पैसा लगाने वालों को गारंटी दी थी कि उन्हें पाँच फीसदी ब्याज की दर से मुनाफ़ा वापस मिलेगा। यह भरोसा देने का मकसद ये था कि ज़्यादा से ज़्यादा निवेश आकर्षित किया जा सके। सरकार ने अपनी गारंटी के बदले रेल संचालन और उस पर व्यय आदि का नियंत्रण अपने हाथ में रखा। रेलों से डाक और सेना की आवाजाही की सुवि

क्या हम जानते हैं, भारत में सहकारिता का प्रयोग कब से शुरू हुआ?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 15/10/2021

ब्रिटिश शासन ने भारतीय किसानों को कुछ परेशानियों से मुक्त किया तो कुछ नई उसके सामने खड़ी कर दीं। इसने आंतरिक अव्यवस्था को खत्म किया। लगान के तौर पर ज़बरदस्ती ज़्यादा पैसे ऐंठने के चलन को भी रोका। इन बुराईयों ने किसानों की उपज को ख़तरे में डाल दिया था। अंग्रेजी शासन ने किसानों को मौका दिया कि वे अपने अतिरिक्त उपज भंडार का ठीक से निस्तारण कर सकें। नगदी फसलें उगा सकें। जमीन पर पट्‌टेदारों के अधिकारों को मान्यता देने का भी लाभ हुआ। लेकिन कुछ अन्य घटनाक्रमों का ग्रामीण आबादी पर विपरीत प्रभाव भी पड़ा। जैसे…

भारत में कृषि विभाग की स्थापना कब हुई?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 13/10/2021

लॉर्ड मेयो 1869-72 तक भारत के वायसराय थे। उन्होंने ब्रिटेन की सरकार को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने लिखा, “दुनिया में भारत जैसा शायद ही कोई देश हो, जहाँ सरकार का कृषि के क्षेत्र से ऐसा सीधा हित जुड़ा हो। भारत सरकार सिर्फ ‘सरकार’ नहीं है, वह मुख्य ज़मींदार भी है। सरकार को जिस संपत्ति के लगान के रूप में बड़ा राजस्व मिलता है, वह किसी निजी मालिक की नहीं, सरकारी है। ऐसे में पूरे देश में कृषि के हालात सुधारने के लिए कदम उठाने पर सरकार और उसकी संपत्ति की अहमियत बढ़ती है। इसीलिए इंग्लैंड में जो काम बड़े जमींदार करते हैं, भारत

अंग्रेजों ने पहली बार लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र कितनी तय की थी?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 12/10/2021

दिसंबर-1858 में ब्रिटेन के तत्कालीन गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि जो लोग “खाली पड़ी जमीनों पर कपास या निर्यात करने लायक अन्य उत्पाद की खेती करना चाहते हैं, उन्हें भारत सरकार जमीन उपलब्ध कराने पर विचार करे। इससे ब्रिटेन को कच्चे माल की अधिक आपूर्ति में हो सकेगी।” इसके बाद ऐसी अधिकांश जमीन सरकार की ओर से बाग़ानों के लिए उपलब्ध करा दी गई। गृह मंत्री के निर्देश में स्पष्ट था कि ऐसी जमीन सिर्फ़ यूरोपीय समुदाय के लोगों को उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना है। यह निर्देश भारत सरकार के लिए तब काम आया, जब उसने 1871 में खाली जमीन लोगों को उपलब्ध कराने संबंधी नियम बनाए। इन नियमों के मुत

ब्रिटिश भारत में कानून संहिता बनाने की प्रक्रिया पहली बार कब पूरी हुई?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 11/10/2021

मैकॉले ने ब्रिटिश-भारत में कानून का राज स्थापित करने के लिए बड़े क्रांतिकारी सुधार सुझाए थे। उनका दृष्टिकोण भी सिर्फ कानूनी ढाँचे और न्यायिक प्रशासन तक सीमित नहीं था। उदाहरण के लिए उन्होंने दिसंबर 1835 में एक समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा था। इस समिति को जेलों से संबंधित मामले और वहाँ के अनुशासन आदि की जाँच का जिम्मा सौंपा जाना था। इसके पीछे उनका तर्क था, “सबसे अच्छी आपराधिक दंड संहिता भी तब तक अल्प-उपयोगी ही है, जब तक कि सज़ा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी मशीनरी न हो।” सो, उनके सुझाव पर यह समिति बनी भी, लेकिन गृह विभाग ने 1838 में आई इसकी रिपोर्ट को ख़ारिज़ कर दिया। दलील दी कि “इसे लागू करने

आज़ादी के बाद पाकिस्तान की पहली राजधानी कौन सी थी?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 10/10/2021

भारत सरकार अधिनियम-1919 में प्रावधान था कि हर 10 साल में इसकी समीक्षा होगी। इसी के मुताबिक 1927 में एक आयोग बना, जो नवंबर में भारत पहुँचा। ब्रिटिश सरकार ने इसे सोच-समझकर दो साल पहले गठित किया। कारण कि ब्रिटेन में 1929 में चुनाव होने थे। उसमें लेबर पार्टी के जीतने की संभावना थी। लेबर पार्टी भारत को ‘स्वराज का अधिकार’ देने की पक्षधर थी। लिहाज़ा तत्कालीन रूढ़िवादी सरकार के गृह मंत्री ने लॉर्ड बिरकेनहैड ने आयोग के ज़रिए संदेश देने की कि वे भी भारत के पक्ष में सोच रहे हैं। जबकि इन्हीं बिरकेनहैड ने ब्रिटिश संसद में 1919 के सुधारों का विरोध किया था। बहरहाल, नए आयोग के गठन का समर्थन

Pages

Subscribe to सरोकार