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जो जीव को घुमाता रहता है, जानिए उस पुद्गल के बारे में

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 29/3/2022

महत्त्वपूर्ण तत्त्वों की चर्चा में अजीव की भी चर्चा आवश्यक है। यह अजीव ही तो है जिसे हम देख पाते हैं। स्पर्श कर पाते हैं। जैन आचार्य कहते हैं जो जीव नहीं, वह अजीव है। जीव का विपरीत अजीव है। अर्थात् जिसमें चेतना नहीं है, जिसमें ज्ञान नहीं है, वह अजीव की श्रेणी में आता है। 

उन्होंने आकाओं के इशारों पर काम में जुटना अपनी बेहतरी के लिए 'विधिसम्मत' समझा

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 24/3/2022

आठ- सीआर कृष्णास्वामी राव, केबिनेट सचिव : केंद्र सरकार के शीर्ष नौकरशाह, जो प्रधानमंत्री से बंधे थे। मध्यप्रदेश के मुख्यसचिव ब्रह्मस्वरूप से जुड़े थे। मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह ने ही तब भोपाल में मीडिया को जानकारी दी थी कि उनके मुख्य सचिव दिल्ली में मंत्रिमंडलीय सचिव के संपर्क में हैं। एंडरसन मामले में केंद्र और राज्य के बीच दिल्ली की सर्वोच्च प्रशासनिक कड़ी। इनके स्तर पर बहुत संभव है कि नरसिंहराव या राजीव गांधी ने ही इन्हें मध्यप्रदेश सरकार से बात करने और एंडरसन को सरकारी विमान से दिल्ली रवाना करने को कहा हो। इन्होंने मुख्यसचिव को केंद्र की मंशा से अवगत कराया हो। तत्कालीन भोप

सुनिए! यूजीसी ने 12वीं के अंकों की मेरिट हटाई है, 12वीं की नहीं

देवांशी वशिष्‍ठ, दिल्ली से, 24/03/2022

आज के इस बुलेटिन में ख़ासः

143 साल में सबसे गर्म फरवरी, जागो भारत जागो

देवांशी वशिष्‍ठ, दिल्ली से, 23-03-2022

इस ख़ास पॉडकास्ट शृंखला में कल बात हुई थी दुनिया भर में बदलते मौसम की। 

अब इसकी अगली कड़ी में सुनिए, क्यों बदल रहा है मौसम, क्यों बढ़ रहा है धरती का तापमान। 

देवांशी ने अपील की है कि अब भी समय है, कि हम ख़ुदगर्ज़ी छोड़कर ठोस कदम उठाएँ। 

अपील ये भी है कि आप क्या कर रहे हैं, क्या करने का संकल्प ले रहे हैं, कमेंट कर बताएँ।

आइए अपनी छोटी-छोटी पहलों के ज़रिए हम एक मुहिम शुरू करें। कमेंट्स में बताएँ- आपने क्या किया।  

यह ज्ञान बड़ी विचित्र चीज है! जानते हैं कैसे...

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 22/3/2022

हम श्रृंखला के पिछले भाग में ‘जीव’ को समझने की कोशिश कर रहे थे। जीव चेतना युक्त हो, विवेक पूर्ण हो आदि। उसकी एक विशेषता थी ज्ञानवान होना। 

यह ज्ञान बड़ी विचित्र चीज है। इसकी विशेषता है कि हर जीव खुद को ज्ञानवान ही समझता है। इसी ज्ञानवान होने की अनुभूति के कारण ही एक जीव अन्य से प्रेम या ईर्ष्या करता है। 

इस ज्ञान की अनुभूति जीवों में प्रेम और ईर्ष्या का कारण ही नहीं अपितु हिंसा और अपराध तक का कारण बनती है। विविध धर्मों के मानने वाले प्रतिधर्म वाले के प्रति वैरभाव तक रखते हैं।

सबसे गर्म 10 वर्षों में से एक रह सकता है 2022, करें उपाय

देवांशी वशिष्‍ठ, दिल्ली से, 22/03/2022

अभी तो मार्च है। जाता हुआ मार्च। याद कीजिए कितना ख़ूबसूरत होता था ये मौसम। लेकिन लोगों ने कूलर-एसी की सर्विस शुरू करा दी है। कुछ के यहां तो चलने भी लगे हैं। आज के इस ख़ास बुलेटिन में जानिए, मौसम के लिहाज़ से कैसा रहेगा ये साल। इसकी अगली कड़ी में देवांशी बताएंगी, क्यों हो रहा है मौसम में इतना परिवर्तन। लेकिन उससे पहले आज सुनिएः  

हो आज रंग है री...आज रंग है री

दीपक गौतम, सतना, मध्य प्रदेश, 19/3/2022

हो आज रंग है री...आज रंग है री। तन - मन अधिक उमंग हर्षायो।

बृज की होरी कान्हा की पिचकारी, गोपियन की रंग-रास बरजोरी। अंगिया-भंगिया संग कान्हा-किशोरी।  मन ललचा गयो मोरा फाग ने हिलोरी।  हो आज रंग है री सखी...आज रंग है री। 

सखियां कहें मोसे कहाँ गओ कान्हा,  मैंने कह दयो रंग में सिमट गओ..भंग में सिमट गओ...मोरे अंग में लिपट गओ।  बो तो उलझ गओ मोरे गेसुअन में,  हमहुँ अरझ गये कान्हा की अंखियन में...सखी री बांकी बतियन में...रास और रसभरी रतियन में।  हो आज रंग है री सखी...आज रंग है री। 

भीड़ में अपना कोना खोजकर कुछ किस्से कहानियाँ सुनना, सुनाना... यही जीवन है

संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से, 19/3/2022

ज़िन्दगी एक लम्बा ट्रैफिक है। आने-जाने वाले वाहनों की भीड़ है। छोटे-बड़े वाहन सड़क पर हर तरफ पसरे हैं। कोलाहल है, आवाज़ें हैं। कर्कश शोर है और धूल-धुआँ लगातार हर पल हर जगह बना हुआ है। मैं इसके बीच से गुजरता हूँ और हर झटके और छोटे-बड़े वाहनों के टल्ले से रोज अपने को बचाकर ले आता हूँ। गहरे अवसाद और तनाव के क्षणों में मेरा खालीपन, मेरी उदासी यह सब याद करके अपनी पीठ थपथपाती है। बहादुर होने का ख़ुद को ही ख़िताब देती है कि मुफ़लिसी के चरम दिनों में और इस क़दर व्यस्त संसार को अनथक देखते-समझते हुए तुम फिर लौट आए जीवन में। किसी के पास समय नहीं कि काँधे पर दो पल महीन सा एक गर्म हाथ रख दे और पूछ ले कि ठीक तो हो

फाग का रंग, युवा कवियों के संग

टीम डायरी, 19/03/2022

होली पर कवियों का जमघट पुरानी परम्परा है। इसी परम्परा को आगे बढ़ा रहा है भारतप्रज्ञाप्रतिष्‍ठानम्। एक ऐसा संगठन, जो संस्कृति के क्षेत्र में नित-नए काम कर रहा है। 

इस रंगोत्सव पर भारतप्रज्ञाप्रतिष्‍ठानम् ने देश के कोने-कोने से कुछ युवा हस्ताक्षरों को एक मंच पर लाने का काम किया है। कवि सम्मेलन रविवार, 20 मार्च, 2022 को है। 

युवा प्रतिभाओं को सुनने के लिए 20 मार्च को शाम 5 बजे जुड़ना न भूलें। जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

संसारी और मुक्त जीव में क्या भेद है, इस छोटी कहानी से समझ सकते हैं

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 15/3/2022

श्रृंखला में पीछे हम जैन दर्शन के अन्तर्गत जीव या आत्मा की चर्चा कर रहे थे। आत्मा वही जो जीव है। जिसमें चेतना है। जिसमें बोध अर्थात् जिसमें समझ हो। जिसमें ज्ञान हो। जिसमें विवेक हो। वह जीव है। ‘आत्मा’ यह शब्द दर्शन के क्षेत्र में बड़े महत्त्व का है। ‘मैं’ यह बोलने वाला ‘मैं’ आत्मा है, अगर ऐसा कहें तो अनुचित नहीं होगा।  यह ‘मैं’ जीव ही कह सकता है। जीव में ही ‘मैं’ होने का भाव रहता है। जैन आचार्य जीव के कई भेद करते हैं। इनमें संसारी और मुक्त भेद महत्त्वपूर्ण हैं। इसमें संसारी और मुक्त भेद का अंतर एक कथा से समझने का प्रयास करते हैं।

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