प्रेरक

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार)

प्यार को आसरा देने वाले का किस्सा

रैना द्विवेदी, भोपाल, मध्य प्रदेश से; 17/12/2020

कहने को तो यह एक बोध-कथा है। लेकिन गौर करें तो सम-बोधकथा सी लगेगी। ऐसी जो समान रूप से हमारी भावनाओं, संवेदनाओं को सम्बोधित करती है। सीधे हमको हमसे रू-ब-रू कराती है। हमें बताती है कि हमारी रोजमर्रा की आपाधापी अगर हमसे कोई चूक हो रही है तो वह कहाँ? और उसे अगर हम सुधारना चाहें तो वह कैसे? इसीलिए सुनने लायक बन पड़ी है। एक बार ही नहीं कई बार, बार-बार।

कुछ अच्छी चीजें हमारे अभ्यास में आ जाएँ, उसके लिए यही एक तरीका भी तो है... बार-बार उनसे दो-चार होते रहना!

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लिज़ा स्थालकर

लिज़ा स्थालकर : खेल दिवस पर भारत का मान बढ़ाने वाली इस बेटी का ज़िक्र

टीम डायरी ; 29/8/2020

आज राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया गया। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचन्द का जन्मदिन। भारत का मान बढ़ाने वाले खेल-खिलाड़ियों को उनके हिस्से का सम्मान देने का दिन भी। लिहाज़ा, दूर देश में भारत का मान बढ़ाने वाली एक बेटी का जिक्र करने का भी इससे बेहतर मौका कोई हो नहीं सकता। उसका नाम लिज़ा स्थालकर है। बेहद प्रेरक कहानी है लिज़ा की। हालाँकि ये बात दीगर है कि भारत के मीडियाने उसकी कहानी को जगह देने की ज़्यादा ज़हमत नहीं उठाई। पर ऑस्ट्रेलिया के अग्रणी अख़बार ‘द गार्जियन’ ने इसी 26 अगस्त को उसकी कहानी प्रकाशित की है। 

भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी आरती डोगरा (बीच में)

संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलताओं की नई कहानियों के बीच एक पुरानी कहानी ‘साढ़े तीन फीट’ की भी!

टीम डायरी ; 5/8/2020

अभी चार अगस्त (मंगलवार) को ही संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी)-2019 की परीक्षा का अन्तिम नतीज़ा आया है। इसमें हरियाणा के प्रदीप सिंह ने पहला स्थान हासिल किया है। प्रदीप सोनीपत जिले के रहने वाले हैं। किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी इस पृष्ठभूमि की वज़ह से वे चर्चा में हैं। चौथी बार में उन्होंने यह सफ़लता हासिल की है। शुरू में दो बार सफल नहीं हुए। तीसरी बार 260वाँ स्थान आया और अब पहला। जैसा कि उन्होंने ख़ुद मीडिया के प्रतिनिधियों को बताया, “बीच में एक बार मैंने हार मान ली थी। लगा कि मुझसे नहीं हो पाएगा। तब पिताजी ने हौसला दिया। इसके बाद फिर तैयारी शुरू की और इस मुकाम तक पहुँचा।”

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