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माँ की ममता से बड़ी कोई शक्ति नहीं

समीर पाटिल, भोपाल, मध्य प्रदेश से 15/4/2021

आज शाम गायत्री मन्दिर जाना हुआ। वहाँ जाता हूँ तो अक्सर कोई न कोई बुज़ुर्ग मिल जाता है। उनसे बातें करता हूँ, तो कुछ नया जानने को मिलता है। आज भी एक बुज़ुर्ग मिल गए। उनसे बातें करने लगा। उन्होंने एक कहानी सुनाई, जिसे मैं हू-ब-हू यहाँ डायरी में दर्ज़ कर रहा हूँ। वे बताने लगे...

स्वयं को जानना है तो वेद को जानें, वे समस्त ज्ञान का स्रोत है

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 13/4/2021

पिछली तीन कड़ियाें में चार्वाक दर्शन के बारे में थोड़ा कुछ जानने-समझने की कोशिश की। जबकि उससे पहले दो कड़ियों में इन प्रश्नों पर विचार किया कि भारतीय दर्शन की उत्पत्ति कैसे हुई होगी? और परम ब्रह्म को जानने का क्रम कैसे शुरू हुआ होगा? आज इसी दूसरे प्रश्न से सिलसिला आगे बढ़ाते हैं। 

बंगाल, भाजपा और क्लबहाउस

टीम डायरी, 11/4/2021

क्लबहाउस (ऐपल यूजर्स के लिए बतकही का अड्डा) पर चुनाव रणनीतिकार प्रशान्त किशोर के साथ चुनिन्दा पत्रकारों (पढ़ना चाहिए, मौजूदा सत्तारूढ़ पार्टी के आलोचक) की बातचीत लीक होने के बाद पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हार और भाजपा की जीत के कयास लगने तेज हो गए हैं। लोग कह रहे हैं कि प्रशान्त किशोर ने हार मान ली। भाजपा बंगाल जीत जाएगी। उनकी प्रतिक्रिया देख ऐसा लग रहा है, जैसे भाजपा के बंगाल जीत जाने से कयामत आ जाएगी, जो अब तक नहीं आई है। 

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार)

‘द बिग बुल’ के बहाने, हेमन्त शाहों को पहचानें, जो हमारे सपनों का मोल-भाव कर रहे हैं

टीम डायरी, 9/4/2021

‘द बिग बुल’ अभिषेक बच्चन की फिल्म है। उन्होंने इसमें अपनी अभिनय क्षमता को खरा सोना साबित करने के लिए जी-तोड़ मेहनत की है। हालाँकि फिल्म कुछ दूसरे मोर्चा पर कमज़ोर पड़ी है। लेकिन यह कई सवालों को उठाने में कामयाब रही, इसमें कोई दो-राय नहीं। बशर्ते, हम हिन्दुस्तान के मुस्तकबिल को ध्यान में रखते हुए देखें, तो। अभिषेक के किरदार हेमन्त शाह की नियति चाहे जो रही हो, लेकिन फिल्म ने ये साबित करने की कोशिश की है कि वह परिस्थितियों में फँसकर मारा गया। हालाँकि इससे पहले उसने हमारी बैंकिंग प्रणाली में व्याप्त कमजोर पहलुओं को अपनी तीक्ष्ण बुद्धि से पकड़कर करोड़ों कमाए

कुमार गन्धर्व : जिनके गाए ‘निर्गुण’ से गुण-अवगुण परिभाषित कर पाता हूँ!

संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से, 8/4/2021

भारतीय मनीषा, विलक्षण संगीतकार और महान गायक पंडित कुमार गंधर्व का आज जन्मदिन है। कर्नाटक से मालवा के देवास में आ बसे। फिर यहीं जीवनभर संगीत और सुरों की आराधना करते रहे। आज उनके गाए कबीर को सुनकर ही मेरे जीवन की गुत्थियाँ सुलझती हैं। उन्हीं के निर्गुण (भजन) से जीवन में गुण-अवगुण को परिभाषित कर पाता हूँ। उन्हीं से सीखा है, "जब होवेगी उमर पूरी, तब टूटेगी हुकुम हुजूरी। उड़ जाएगा हंस अकेला।"

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार)

‘मत कर तू अभिमान’ सिर्फ गाने से या कहने से नहीं चलेगा!

संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से, 7/4/2021

पूरा जीवन राय बनाने में, विचारों को संश्लित करने में, सघन अनुभूतियों की जमीन को उर्वरा बनाने में ही निकलता नज़र आ रहा है। यह प्रक्रिया उस एकांत से बार-बार गुजरी, जिसने एक बड़ी समझ बनाने में मदद की पर जब भी कहीं कुछ दिखा, लगा और भीतर से महसूस किया तो तन-मन शीतल न हो पाया। एक अगन में, ज्वर में भावनाएँ उफनती रहीं और अपनी समझ से कुछ कह दिया।

आचार्य चार्वाक के मत का दूसरा नाम ‘लोकायत’ क्यों पड़ा?

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 6/4/2021

भरत अपने ननिहाल से वापस अयोध्या पहुँचते हैं। अयोध्या में स्थितियाँ बहुत विकट थीं। एक तरफ राज सिंहासन प्रतीक्षा कर रहा था। दूसरी तरफ पिता की मृत्यु और अग्रज के वन गमन के दुःख से हृदय संतप्त था। किसका चयन करें। धर्मज्ञ भरत अपने कुल की मर्यादा के अनुरूप  पुत्रधर्म के निर्वाह के बाद दलबल के साथ श्रीराम को मनाकर वापस लाने निकल पड़ते हैं। श्रीराम के पास पहुँचकर मनाने के क्रम में ऋषि जाबालि श्रीराम से कहते हैं, “आप व्यर्थ वन जा रहे हो। मृत्यु के साथ सभी सम्बन्ध समाप्त हो जाते हैं। अब दशरथ आप के पिता नहीं हैं, न आप उनके पुत्र (वाल्मीकिविरचित रामायण, अयोध्याकाण्ड, सर्ग-108 श्

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार)

रातभर नदी के बहते पानी में पाँव डालकर बैठे रहना...फिर याद आता उसे अपना कमरा

संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से, 31/3/2021

उजालों में अँधेरे देखने का आदी था वो। जब दुनिया जागती, उसे लगता कि अब सूरज ढला है। रातभर नदी के बहते पानी में पाँव डालकर बैठे रहना...फिर याद आता उसे अपना कमरा। वह नीली दीवार, गाढ़े नीले रंग में पुती हुई, जो तीसरे माले पर बनी थी। कमरे के ठीक पीछे अपनी नीलाई की रोशनी में पूरी ताकत के साथ ज़िन्दा थी। 

नदी का पानी धरती के इस भू-भाग पर अविचल बह रहा है। निर्बाध और उद्दाम वेग से। वह अदभुत है। पानी में घुटने के नीचे से पाँव के पंजे तेज बहाव में दो-चार मीटर बह जाते। तब लगता कि शरीर का ऊपरी हिस्सा स्थूल और स्थिर न होता तो पानी के साथ पता नही कहाँ से कहाँ पहुँच जाता।

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार)

चार्वाक हमें भूत-भविष्य के बोझ से मुक्त करना चाहते हैं, पर क्या हम हो पाए हैं?

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 30/3/2021

आचार्य चार्वाक बड़ी सुन्दर बात कहते हैं। उनकी बातें आज वर्तमान युग के एकदम अनुकूल हैं। बल्कि एक विचार तो यह भी हो सकता है कि वर्तमान बैंकिंग प्रणाली में प्रचलित समान मासिक किश्त (EMI) व्यवस्था शुरू करने वाला जरूर चार्वाक का अनुयायी रहा होगा। आज देखें, बैंक हर चीज ईएमआई पर देने को तैयार है। हम भी सब कुछ ईएमआई पर लेकर काम चला रहे हैं। और कोरोना महामारी ने तो हमें अनुभव करा दिया है कि हमारी ज़िन्दगी भी ईएमआई पर ही है। मानो, ईएमआई न भरने वालों से ये महामारी बकाया वसूल रही है, “लाओ वापस करो दी गई साँसे, तुमने

मैं अगर चाय छोड़ सकता हूँ, तो यक़ीन करना चाहिए- कोई कुछ भी कर सकता है

गजेन्द्र सोनी, जौनायचा खुर्द, अलवर, राजस्थान से, 27/3/2021

चाय। चाय केवल इसीलिए नहीं पी जाती कि अच्छी लगती है। चाय पीने के और भी कई कारण हो सकते हैं। चाय आदर-सत्कार की अनिवार्य वस्तु मानी जाती है। चाय पर न जाने कितने रिश्ते बन-बिगड़ जाया करते हैं। और फिर मैं तो ठहरा चाय का शौकीन। कोई मुझसे उसकी बात भी छेड़े, तो बातचीत का विस्तार फिर चाय की चुस्कियों के साथ ही होता है। 

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